एचएसजी टेस्ट कब करवाना चाहिए?
एच इस जी टेस्ट अक्सर तब करवाया जाता है जब किसी महिला को गर्भधारण मैं परेशानी हो रही हो या डॉक्टर को उतेरुस को और फेलोपियन तुबेस की जांच करनी हो।
एच इस जी टेस्ट की जांच कब करनी चाइये
१) यह टेस्ट पीरियड्स ख़तम होने क बाद लेकिन ओवुलेशन के पहले करवाना सही रहता है। इस से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है और टेस्ट के रिजल्ट ज़्यादा सटीक होते है।
२) इंफर्टलिटी की समस्या हो: अगर एक साल तक नियमित प्रयत्न करने से सफलता नहीं मिल रही हो या गर्भदाहरण नहीं हो रहा हो तो डॉक्टर यह टेस्ट कराने की सलाह देते hai
३) फेलोपियन नाली मई ब्लॉकेज के कारन एच इस जी की जांच करवाई जाती है। अगर डॉक्टर को संदेह हुआ की की नाली ब्लॉक है , तो
इस टेस्ट से पता चलता है की नाली ब्लॉक है या बंद है।
४) miscarriage की रिस्क: अगर लगातार गर्भपात की रिस्क हो रही हो तो गर्भ की बनावट या अन्य समस्याओं के लिए
यह टेस्ट किया जाता है।
५) उतेरुस की गलत बनावट: अगर उतेरुस की गलत बनावट के कारन महिला के पीरियड्स मैं गड़बड़ी, ज़्यादा ब्लीडिंग या अन्य समस्याएं
होती हैं तो डॉक्टर ये टेस्ट करवाने क लिए सलाह देते है।
टेस्ट से पहले ये बातें याद रखें।
१)टेस्टिंग से पहले एंटीबायोटिक दी जाती है ताकि संक्रमण की सम्भावना ना हो।
२)कुछ महिलाओं को अगर
हल्का दर्द या परेशानी हो रही हो तो
इसलिए डॉक्टर पेनकिलर की सलाह देते है।
३) अगर किसी को गर्भदाहरण का संदेह हो तो ये टेस्ट नहीं करवाना चाइये।
निष्कर्ष:
एच इस जी टेस्ट उन महिलाओं क लिए किया जाता ह जो गर्भधारण मैं कठनाईन महसूस करती है या फिर डॉक्टर को गर्भ क आकार की सरंचना की
जांच करनी होती है। यह जांच मासिक धर्म ख़तम होने क बाद ६- १० दिन क बीच करवाना सबसे सही रहता है। इस समय main सटीक परिमाण मिलते है और संक्रमण का खतरा काम रहता है।
और इसी के साथ ही अगर आपको इनफर्टिलिटी, हर बार एबॉर्शन, नाली का ब्लॉकेज, या गर्भशय के बनावट का आकर पता करना होता है। यह टेस्ट मासिक धर्म ख़तम होने क बाद ६-१० दिन मैं कराने से सटीक परिमाण मिलते है और संक्रमण का खतरा कम रेहता है।
अगर आपको इनफर्टिलिटी, बार बार मिस्काररिएगे की सम्भावना, नाली का ब्लॉकेज या गर्भाशय की समस्याओं की आशंका है, तो
डॉक्टर की सलाह से यह टेस्ट करवाना फायदेमंद होता है। टेस्ट से पहले ज़र्रोरी सावधानी बरते और डॉक्टर se सलाह
ले।

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