मैं अपनी गर्भावस्था को कितनी जल्दी स्कैन कर सकती हूं?
सैगल
डाइगोस्टिक।
गर्भवस्था
का मात्र ख्याल ही एक महिला के मन मैं कई सवाल उठा सकता है। जिनमे से सबसे
महत्वपूर्ण सवाल यह है की मैं अपनी गर्भवस्था को कितना जल्दी स्कैन कर सकती हूँ। गर्भवस्था की स्कैनिंग अल्ट्रासाउंड
द्वारा की जाती है। गर्भावस्था की
प्लानिंग एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया ह।
अल्ट्रासाउंड की जांच द्वारा गर्भवस्था मैं पल रहे शिशु के स्वस्थ होने की
और विकास की जानकारी मिलती है। इस ब्लॉग मैं हम जानेंगे की गर्भवस्था के किन चरणों मैं हम शिशु की जांच करा सकते है।
सैगल डाइग्नोस्टिक सीतापुर मैं उत्तम सत्तर की जांच प्रदान करता है और
साथ ही साथ विभिन प्रकार की गर्भावस्था की जांच और डायग्नोस्टिक टेस्टिंग बी करता है।
गर्भवस्था
की शुरुआती जांच कब कराई जा सकती है ?
गर्भवस्था
की सबसे पहेली जांच ६ से ८ सप्ताह के बीच कराई जा सकती है। इसे पहला तिमाही स्कैन
भी कहा जाता है। इस जांच का मुख्या उद्देश्य पूर्ण रूप से यह सुनिक्षित करना होता
है की :
१)
गर्भवस्था सही तरीके से बढ़ रही है या नहीं।
२)
गर्भवस्था मई भ्रूण की स्थिति सही है या नहीं।
३) भ्रूण
की ह्रदय गति सही रूप से चल रही है या नहीं।
४)
प्रेग्नेंसी सिंगल है या ट्विन्स प्रेगनेंसी है या फिर उस से भी अधिक है।
प्रारंभिक
गर्भवस्था स्कैन के प्रकार।
१)
ट्रान्सवजिनल अल्ट्रासाउंड ( ६ से ८हफ्ते): इस प्रकिरिया मैं योनि के अंदर एक विशेष प्रकार की प्रोब को
डालकर भ्रूण की स्पष्ट तस्वीर ली जाती है।
यह प्रकिरिया प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरण मैं भ्रूण के विकास के बारे मैं
जानकारी लगाने मैं मदद करती है।
२)
ट्रांसएब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड ( ८ से १२ हफ्ते): यह स्कैन पेट पर जेल लगाकर किया जाता है।
इस स्कैन के द्वारा भ्रूण की स्थति
आकार,
और ह्रदय की गति देखि जाती
है। यह स्कैन ८ सप्तः से अधिक गर्भवस्था के लिए लाभदायक होता है।
गर्भवस्था
के दौरान अन्य महत्वपूर्ण स्कैन।
१)
डेटिंग स्कैन:
डेटिंग स्कैन ६ से ९ हफ्ते के बीच मैं कराये जाते हैं। यह स्कैन गर्भवस्था की सही
अवधि का पता लगाने मैं मदद करता है। साथ ही साथ यह संभावित डिलीवरी डेट का अनुमान
लगाने मैं मदद करता है।
२)
ऐंटी स्कैन ( ११-१४ सप्तः)
इस स्कैन को नुक्लेअर ट्रांस्लूसेंसी स्कैन के नाम से भी जाना जाता है। इस स्कैन
से डाउन सिंड्रोम की जांच का अनुमान लगाया जाता है।
३)
एनामौली स्कैन (१८ से २२ सप्ताह) : इस स्कैन के द्वारा भ्रूण के महत्वपूर्ण अंगो जैसे मास्तिस्ख,
दिल, रीढ़ की हड्डी, किडनी अन्य
की जांच
की जाती है।
४)
ग्रोथ स्कैन:
इस स्कैन के द्वारा शिशु के वजन, प्लेसेंटा
की स्तिथि और ामिनीओटिक फ्लूइड की मात्रा की जांच की जाती है।
क्या
समय से पहले कैन करना सुरक्षित होता है ?
हाँ
गर्भवस्था की शुरुआत मैं स्कैनिंग पूरी तरह से सुरक्षित मानी जाती है और साथ ही
साथ शिशु की अवस्था के बारे मैं भी ज्ञान प्रद्दन करती है। यह स्कैन भ्रूण कोई
हानि नहीं होने देता और डॉक्टर को गर्भवस्था की सही स्थति समझाने मैं मदद करता है।
निष्कर्ष:
अगर आप
पता लगाना चाहते है आप अपनी गर्भावस्था को कितना जल्दी स्कैन करा सकते है तो आपको
सूचित करना चाहूंगा की
आप गर्भावस्था की ६वेें महीने से जांच करा सकते है। इसी के साथ ही अगर आप को किसी कारन अचानक पेट मैं तेज़ दर्द का अनुमान होरा है या ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर को तुरंत संपर्क करना चैहिये। सही समय पर स्कैनिंग कराने से गर्भवस्था के स्वास्थ का अनुमान लगे जा सकता है। गर्भवस्था मैं डॉक्टर की सलहा लेना काफी महत्वपूर्ण है और उन्ही की सलाह द्वारा अल्ट्रासाउंड की जांच करना भी काफी फायदेमंद साबित होता है। स्कैन के द्वारा जांच कराने से मन की शान्ति प्राप्त होती है और साथ ही साथ शिशु की सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।

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